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मिशाल : दहेज और फिजुलखर्च के बिना मात्र 17 मिनट में हो गई शादी

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• सत्संग बना मंडप,भक्त बने बाराती-घराती, गुरुवाणी में हुई शादी , बिना दिखावा 17 मिनट में की शादी

संत रामपाल जी महाराज द्वारा तैयार हो रहा स्वच्छ समाज

पाली । घाणेराव पंचायत के गुड़ा भोपसिंह राजस्व गांव में अक्षय तृतीया पर शनिवार को हुई शादी एक मिसाल बन गई है। शादी में दुल्हन ने तो हाथ में मेहंदी रचाई और ही दूल्हा ने कोई विशेष तैयारी की थी। शादी में तो बैंडबाजा था और ही दुल्हन को ले जाने के लिए सजी हुई गाड़ी आई। शादी में बड़ी संख्या में बाराती जरूर मौजूद थे। घाणेराव से कुछ दूरी पर स्थित गुड़ा भोपसिंह गांव में शनिवार की दोपहर में सत्संग में 17 मिनट की गुरुवाणी में शादी कर दी। इसके बाद दोनों वर-वधु को सभी ने आशीर्वाद देकर विदा कर दिया। सत्संग के आयोजकों ने बताया कि ऐसी शादी पाली जिले में पहली बार हुई है। वहीं इस शादी में किसी प्रकार की कोई फिजूलखर्ची नहीं की गई। दूल्हा दुल्हन दोनों 10वीं पास है।

दुल्हनके पिता है शिक्षक : गुड़ाभोपसिंह निवासी पेमाराम पुत्र परताराम भील स्वयं एक शिक्षक है। वह राजसमंद जिले की थुरावत गांव में स्थित विद्यालय में कार्यरत है। उन्होंने अपनी पुत्री तुलसी भील की सगाई एक सत्संग में सरदारगढ़ के रोशनदास पुत्र कालूदास से की थी। शिक्षक पेमाराम भील ने समाज में फिजूलखर्ची को रोकने के लिए पहल की। जिसमें किसी प्रकार की कोई तैयारी नहीं की और नहीं दुल्हन ने अपने हाथों में मेहंदी रचाई और नहीं कोई श्रृंगार किया। दोपहर तीन बजे सत्संग का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में आसपास के गांवों के बारातियों ने भाग लिया। बिना पंडित द्वारा मंत्र पढ़े और बिना श्रृंगार किए मात्र 17 मिनट में गुरुवाणी से शादी कर दी। इस दौरान सत्संग शादी में नाथूदास, शांतुदास, अर्जुनदास, जगदीश दास आदि उपस्थित थे।

दोनों परिवारों ने शादी के कार्ड भी नहीं छपवाए : किसी भी समाज में शादी की बात शुरू होती है तो सबसे पहले वर-वधु परिवारों की ओर से कार्ड छपवाने की चर्चा की जाती है। कार्ड पर ही हजारों रुपए खर्च कर दिए जाते हैं। मगर गुड़ा भोपसिंह गांव में शनिवार को हुई शादी में फिजूलखर्च को रोकने के लिए दोनों परिवारों की ओर से कार्ड नहीं छपवाने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने-अपने रिश्तेदारों को मोबाइल से ही शादी में आने के लिए निमंत्रण दे दिया।

शादी में नहीं सत्संग में आने वाले लोगों को सादा भोजन करवाया

गुड़ाभोपसिंह गांव में सत्संग कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें 17 मिनट में शादी की गई। इस शादी में आने वाले बारातियों के लिए नहीं बल्कि सत्संग में भाग लेने वाले भक्तों के लिए सादा भोजन बनाया गया था। जिसको प्रसाद के रूप में भक्तों ने ग्रहण किया।

शादी में दुल्हन ने ना तो मेहंदी लगाई ही ना ही बैंडबाजे वालों को बुलाया

गुड़ाभोपसिंह में शनिवार को हुई भील समाज की शादी किसी मिसाल से कम नहीं थी। दुल्हन के पिता ने शिक्षक होते हुए भी बिना किसी दिखावा के अपनी पुत्री शादी कर दी। जिसमें दुल्हन तुलसी ने न तो हाथों पैरों में मेहंदी रचाई और न हीं मांग में सिंदूर भरा। शादी में बैंडबाजों ढोल का भी शोर तक नहीं सुनाई दिया।

फिजूलखर्च रोकने के लिए की पुत्री की शादी

शादीको लेकर लोगों द्वारा फिजूलखर्च के रूप में लाखों रुपए खर्च कर दिए जाते हैं। मगर गरीब परिवार के लिए शादी करना भी आजकल मुश्किल हो रहा है। ऐसे में शादी को लेकर गरीब लोग कर्जा कर लेते हैं, जिनका ब्याज देना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। समाज में शादी के नाम पर फिजूलखर्च रोकने के लिए अपनी पुत्री की शादी मात्र एक कपड़े की जोड़े में कर दी।   

 पेमाराम भील गुड़ा भोपसिंह, शिक्षक-

• फिजूलखर्ची रोकने के लिए भील समाज की पहल, सत्संग के अनुयायी बने बराती-घराती

• शादीमें दुल्हन में तो हाथ में मेहंदी रचाई और ही दूल्हे ने कोई विशेष तैयारी की थी

• गुड़ाभोपसिंह गांव में शनिवार की दोपहर में सत्संग में 17 मिनट की गुरुवाणी में शादी कर दी 

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Banti Kumar
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