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क्या कहता है कुरान का ज्ञान? | The Knowledge of Quran in Hindi | BKPK VIDEO

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क्या कहता है पाक कुरआन?

बिस्मिल्लाहिर्रमानिर्रहीम (بِسمِ اللَّهِ الرَّحمٰنِ الرَّحيمِ):- शुरू खुदा का नाम लेकर जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

-quran

जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दु मुस्लिम सिक्ख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।

– Sant Rampal Ji

(रामपाल दास) अर्थात् हम सब जीव हैं। मानव शरीर मिला है। हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख तथा ईसाई सब मानव हैं। इसलिए हम सबका एक मानव धर्म है। मानवता (इंसानियत) कर्म है। इस कारण से कोई भिन्न धर्म नहीं है। पूरी पृथ्वी के मानव (स्त्री-पुरूष) एक खुदा (प्रभु) के बच्चे हैं।}

गरीब, नबी मुहम्मद नमस्कार है, राम रसूल कहाया।
एक लाख अस्सी कूं सौगंध, जिन नहीं करद चलाया।।1।।

गरीब, अर्श कुर्श पर अलह तख्त है, खालिक बिन नहीं खाली।
वे पैगम्बर पाक पुरूष थे, साहिब के अबदाली।।2।।

अर्थात् संत गरीबदास जी ने कहा है कि नबी मुहम्मद जी को मेरा नमस्कार (सलाम) है। वे (राम) अल्लाह के (रसूल) संदेशवाहक कहलाए। बाबा आदम से लेकर अंतिम नबी हजरत मुहम्मद जी तक एक लाख अस्सी हजार नबी हुए हैं तथा जो उनके अनुयाई उस समय थे, कसम है उन्होंने (करद) छुरी चलाकर जीव हिंसा नहीं की।(वाणी 1)

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(अर्श) आसमान के (कुर्श) अंतिम छोर पर ऊपर (अल्लाह) परमेश्वर का (तख्त) सिंहासन है। वह वहाँ पर विराजमान है। परंतु उस (खालिक) जगत के मालिक (बिन नहीं खाली) की पहुँच प्रत्येक प्राणी तथा प्रत्येक लोक तक है। उसकी शक्ति सर्वव्यापक है। उस खालिक से कुछ नहीं छुपा है। कोई स्थान ऐसा नहीं है जो खुदा की पहुँच से बाहर हो। वे एक लाख अस्सी हजार पैगम्बर (Massengers) तो (पाक पुरूष थे) पवित्र महापुरूष थे जो (साहिब के) अल्लाह के (अबदाली) कृपा पात्र थे।(वाणी 2)

{नोट:- यहाँ पर यह स्पष्ट करना अनिवार्य समझता हूँ कि कुछ मुसलमान प्रवक्ता कुल एक लाख चैबीस हजार पैगम्बर मानते हैं। परमेश्वर कबीर जी ने, उनके शिष्य गरीबदास जी ने तथा बिश्नोई धर्म के प्रवर्तक बाबा जम्बेश्वर जी ने एक लाख अस्सी हजार कुल पैगंबर बताए हैं। पूर्ण परमात्मा ने जो बताया है, वह गलत नहीं हो सकता। फिर भी हमने यह जानना है कि जीव हिंसा माँस भक्षण महापाप बताया है जो उन एक लाख अस्सी हजार या एक लाख चैबीस हजार ने भी वह पाप नहीं किया। हमें भी नहीं करना चाहिए।}

 


कुरान में मांस खाने का आदेश अल्लाह का नहीं है

‘‘पाक कुरआन से ज्ञान’’

’’बाईबल तथा कुरआन का ज्ञानदाता एक है‘‘

जिस अल्लाह ने ’’कुरआन‘‘ का पवित्र ज्ञान हजरत मुहम्मद पर उतारा। उसी ने पाक ’’जबूर‘‘ का ज्ञान हजरत दाऊद पर, पाक ’’तौरेत‘‘ का ज्ञान हजरत मूसा पर तथा पाक ’’इंजिल‘‘ का ज्ञान हजरत ईसा पर उतारा था। इन सबका एक ही अल्लाह है।

प्रमाण:- कुरआन मजीद की सुरा अल् मुअमिनून नं. 23 आयत नं. 49-50:- आयत नं. 49 ( وَلَقَد آتَينا موسَى الكِتابَ لَعَلَّهُم يَهتَدونَ):- और मूसा को हमने किताब प्रदान की ताकि लोग उससे मार्गदर्शन प्राप्त करें।

आयत नं. 50 (وَجَعَلنَا ابنَ مَريَمَ وَأُمَّهُ آيَةً وَآوَيناهُما إِلىٰ رَبوَةٍ ذاتِ قَرارٍ وَمَعينٍ ):- और मरयम के बेटे और उसकी माँ को हमने एक निशानी बनाया और उनको एक उच्च धरातल पर रखा जो इत्मीनान की जगह थी और स्रोत उसमें प्रवाहित थे।

सुरा अल् हदीद नं. 57, आयत नं. 26.27:- आयत नं. 26(وَلَقَد أَرسَلنا نوحًا وَإِبراهيمَ وَجَعَلنا في ذُرِّيَّتِهِمَا النُّبُوَّةَ وَالكِتابَ ۖ فَمِنهُم مُهتَدٍ ۖ وَكَثيرٌ مِنهُم فاسِقونَ ):- हमने नूह और इब्राहिम को भेजा और उन दोनों की नस्ल में नुबूवत (पैगम्बरी) और किताब रख दी। फिर उनकी औलाद में से किसी ने सन्मार्ग अपनाया और बहुत से अवज्ञाकारी हो गए।

आयत नं. 27 (ثُمَّ قَفَّينا عَلىٰ آثارِهِم بِرُسُلِنا وَقَفَّينا بِعيسَى ابنِ مَريَمَ وَآتَيناهُ الإِنجيلَ وَجَعَلنا في قُلوبِ الَّذينَ اتَّبَعوهُ رَأفَةً وَرَحمَةً وَرَهبانِيَّةً ابتَدَعوها ما كَتَبناها عَلَيهِم إِلَّا ابتِغاءَ رِضوانِ اللَّهِ فَما رَعَوها حَقَّ رِعايَتِها ۖ فَآتَينَا الَّذينَ آمَنوا مِنهُم أَجرَهُم ۖ وَكَثيرٌ مِنهُم فاسِقونَ ):- उनके बाद हमने एक के बाद एक अपने रसूल भेजे और उनके बाद मरयम के बेटे ईशा को भेजा और उसे इंजील प्रदान की और जिन लोगों ने उनका अनुसरण किया। उनके दिलों में हमने तरस और दयालुता डाल दी और रहबानियत (सन्यास) की प्रथा उन्होंने खुद आविष्कृत की। हमने उनके लिए अनिवार्य नहीं किया। मगर अल्लाह की खुशी की तलब में उन्होंने खुद ही यह नई चीज निकाली और फिर इसकी पाबंदी करने का जो हक था, उसे अदा न किया। उनमें से जो लोग ईमान लाए हुए थे, उनका प्रतिफल हमने उनको प्रदान किया। मगर उनमें से ज्यादा लोग अवज्ञाकारी हैं।

{सन्यास यानि घर त्यागकर पहाड़ों व जंगलों में परमात्मा की तलाश में चले जाना। जैसे शेख फरीद, बाजीद आदि-आदि। उनके विषय में कहा है।}

अन्य प्रमाण:-

कुरआन मजीद की सूरः अल बकरा-2 आयत नं. 35-38 तक कुरआन का ज्ञान देने वाला अल्लाह कह रहा है कि:- आयत नं. 35 (وَقُلنا يا آدَمُ اسكُن أَنتَ وَزَوجُكَ الجَنَّةَ وَكُلا مِنها رَغَدًا حَيثُ شِئتُما وَلا تَقرَبا هٰذِهِ الشَّجَرَةَ فَتَكونا مِنَ الظّالِمينَ):- फिर हमने आदम से कहा ‘‘तुम और तुम्हारी पत्नी दोनों जन्नत (स्वर्ग) में रहो और यहाँ जी भरकर जो चाहो खाओ, किन्तु इस पेड़ के निकट न जाना नहीं तो जालिमों में गिने जाओगे।’’

आयत नं. 36 ( فَأَزَلَّهُمَا الشَّيطانُ عَنها فَأَخرَجَهُما مِمّا كانا فيهِ ۖ وَقُلنَا اهبِطوا بَعضُكُم لِبَعضٍ عَدُوٌّ ۖ وَلَكُم فِي الأَرضِ مُستَقَرٌّ وَمَتاعٌ إِلىٰ حينٍ):- अन्ततः शैतान ने उन दोनों को उस पेड़ की ओर प्रेरित करके हमारे आदेश की अवहेलना करवा दी। हमने हुकम दिया कि अब तुम सब यहाँ से उतर जाओ। एक-दूसरे के दुश्मन बन जाओ। (साँप और इंसान एक-दूसरे के शत्रु हो गए) और तुम्हें एक समय तक धरती पर ठहरना है। वहीं गुजर-बसर करना है।

आयत नं. 37 (فَتَلَقّىٰ آدَمُ مِن رَبِّهِ كَلِماتٍ فَتابَ عَلَيهِ ۚ إِنَّهُ هُوَ التَّوّابُ الرَّحيمُ):- उस समय आदम ने अपने रब से कुछ शब्द सीखकर तौबा (क्षमा याचना) की जिसको उसके रब ने स्वीकार कर लिया क्योंकि वह बड़ा क्षमा करने वाला और दया करने वाला है।

आयत नं. 38 (قُلنَا اهبِطوا مِنها جَميعًا ۖ فَإِمّا يَأتِيَنَّكُم مِنّي هُدًى فَمَن تَبِعَ هُدايَ فَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ):- हमने कहा कि ‘‘तुम अब यहाँ से उतर जाओ।’’ फिर मेरी ओर से जो मार्गदर्शन तुम्हारे पास पहुँचे, उस अनुसार (चलना)। जो मेरे मार्गदर्शन के अनुसार चलेंगे, उनके लिए किसी भय और दुःख का मौका न होगा।

(कुरआन मजीद से लेख समाप्त)।

 


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Banti Kumar
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